लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह के विरुद्ध ग्लोबल रिसर्च सेन्टर की रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया है।
इस हंगामे के बाद सोशल मीडिया पर नसरुल्लाह लेबनान के समर्थक हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। ग्लोबल रिसर्च सेन्टर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि सैयद हसन नसरुल्लाह ने लगभग 1.6 अरब डॉलर विदेशी बैंकों में फ़िक्स डिपाज़िट कर रखा है और उन्होंने वर्षों पहले से ख़ुद को प्रलय के दिन या अंतिम दिनों के लिए तैयार करना शुरु कर दिया है जिसके तहत वह या तो फ़रार होंगे या कहीं छिप जाएंगे।
इस सेन्टर ने दावा किया कि सैयद हसन नसरुल्लाह विदेशी बैंकों में पैसा जमा कर रहे हैं और उसके बाद वह पैसे उनके निकटवर्तियों और परिजनों के बैंक खातों में ट्रांस्फ़र हो जाते हैं।
ग्लोबल रिसर्च सेन्टर ने जैसे ही यह दावा किया, हिज़्बुल्लाह के कुछ विरोधियों जैसे समीर जाजा और सामी अलजमील ने भी उनके विरुद्ध ज़हर उगते हुए इसी से मिलती जुलती बात कही। बात यहीं पर ख़त्म नहीं हुई और लेबनान के ईसाई समुदाय के नेता बशारा पेत्रिस ने भी हिज़्बुल्लाह और अमल आंदोलन की निंदा करते हुए उन पर सरकार के गठन में रोड़े अटकाने का आरोप लगा दिया।
यह ऐसी हालत में है कि लेबनान के शीया मुसलमानों की सर्वोच्च परिषद ने हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध इस प्रकार के बयान को अवास्तविक और निंदनीय करार दिया और कहा कि हिज़्बुल्लाह ने देश की आज़ादी, ज़ायोनी और तकफ़ीरी आतंकवादियों से मुक़ाबले में अपने जवानों को क़ुर्बान कर दिया ताकि पूरा देश राष्ट्रीय स्वतंत्रता, स्थिरता और प्रतिष्ठा का स्वाद चखे।
लेबनान और अरब तथा अन्य मुस्लिम देशों में सोशल मीडिया कार्यकर्ता भी पीछे नहीं रहे और इन व्यवस्थित हमलों का जवाब देने लगे।
शफ़ी अलाजील ने ट्वीट किया कि बनी उम्मइया और द्वेष में डूब हुए इब्ने तैमिया द्वारा मिंबरों से हज़रत अली को बुरा भला कहे जाने के बावजूद लेबनान के दुश्मन जिनको लेबनानियों की इज़्ज़त और प्रतिष्ठा की कोई फ़िक्र नहीं है, अब भी देश को फ़्रांस के अधीन देने के प्रयास में लगे हुए हैं किन्तु हमेशा ही इज़्ज़त का बोलबाला रहेगा।
एक अन्य कार्यकर्ता हसन ज़ैनुद्दीन कहते हैं कि उनकी सच्चाई, धैर्य, विनम्रता और विजय से तुम जल रहे हो, सच्चाई उनकी पहचान है, उनके बयान तुम्हें डरा देते हैं, हम हमेशा उनका साथ देंगे।
रशा नामक एक लड़की लेबनान में हिज़्बुल्लाह और सैयद हसन नसरुल्लाह की भूमिका पर बल देते हुए लिखती है कि वह एकमात्र इंसान हैं जिन्होंने जुलाई 2006 के युद्ध में सीमावर्ती गांव के निवासियों को हमलों से बचाया, एजेन्टों की तरह इस्राईल का दामन नहीं पकड़ा और जब इन एजेन्टों में से कुछ वापस लौटे तो उनसे बदला नहीं लिया।
समीर माज़िन लिखते हैं कि सैयद हसन आप हमेशा से जलने वालों की आंख में कांटा बने रहेंगे और जो भी आप के विरुद्ध बोलेगा, उससे भिड़ जाऊंगा।
दुआ लिखती हैं कि वे झूठ बोल रहे हैं, उन्होंने ही देश का माल लूटा, सांप्रदायिकता को हवा दे रहे हैं, लेकिन आपका स्थान हमेशा से ही इन लोगों से ऊंचा है।
सैयद हसन नसरुल्लाह, हिज़्बुल्लाह और लेबनान के शीया मुसलमानों को बदनाम करने की यह अमरीका और इस्राईल की चाल है जिसका लक्ष्य देश में एक भ्रष्ट राजनैतिक दल का गठन है जो प्रतिरोध को नुक़सान पहुंचाने का प्रयास करे लेकिन उनको एक बार फिर विफलता हाथ लगेगी क्योंकि सत्य हमेशा से प्रतिरोध के साथ बाक़ी रहेगा।